मैया मैं नहि माखन खायो Maiya Main Nahi Makhan Khayo Lyrics

Maiya Main Nahi Makhan Khayo Lyrics

मैया मैं नहि माखन खायो लिरिक्स और भावार्थ | Maiya Main Nahi Makhan Khayo Lyrics in Hindi & English (सूरदास के पद)

भक्तिकाल के शिरोमणि कवि महाकवि सूरदास जी द्वारा ब्रजभाषा में रचित “मैया मैं नहि माखन खायो” वात्सल्य रस का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। इस पद में जब मैया यशोदा कान्हा के मुख पर माखन लगा देखकर उन्हें डांटती हैं, तब बाल-कृष्ण किस प्रकार अपनी चतुर और भोली-भाली दलीलों से मैया को निरुत्तर कर देते हैं, इसका अत्यंत सजीव चित्रण किया गया है।

यह पद न केवल कृष्ण-भक्तों को आनंदित करता है, बल्कि स्कूली परीक्षाओं में भी इसके शब्दार्थ और व्याख्या बार-बार पूछे जाते हैं।

🪔 मैया मैं नहि माखन खायो लिरिक्स (हिन्दी में)

मैया मैं नहि माखन खायो ।
भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो ॥

चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो ।
मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो ॥

ग्वाल-बाल सब बैर परे हैं, बरबस मुख लपटायो ।
तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो ॥

जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं, जानि परायो जायो ।
ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो ॥

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सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो ॥

📿 Maiya Main Nahi Makhan Khayo Lyrics in English

Maiya Main Nahi Makhan Khaayo.
Bhor Bhayo Gaiyan Ke Paachhe, Madhuban Mohi Pathaayo.

Chaar Pahar Bansi-vat Bhatkyo, Saanjh Pare Ghar Aayo.
Main Baalak Bahiyan Ko Chhoto, Chheeko Kehi Bidhi Paayo.

Gwaal-Baal Sab Bair Pare Hain, Barbas Mukh Laptaayo.
Tu Maata Man Ki Ati Bhori, Inke Kahe Patiyaayo.

Jiya Tere Kachhu Bhed Upji Hain, Jaani Paraayo Jaayo.
Ye Le Apni Lakuti Kamariya, Bahutahin Naach Nachaayo.

Surdas Tab Bihansi Jasoda, Lai Ur Kanth Lagaayo.

Shree Krsihna Ke Naya Bhajan Lyrics

🌸 मैया मैं नहि माखन खायो का सरल भावार्थ (व्याख्या)
  1. कान्हा की पहली दलील (समय का तर्क):
    बाल कृष्ण मैया यशोदा से कहते हैं— “हे मैया! मैंने माखन नहीं खाया है। तुमने तो सुबह होते ही मुझे गायों को चराने के लिए मधुबन भेज दिया था। मैं पूरे चार पहर (दिनभर) बंसीवट के जंगलों में भटकता रहा और अब शाम होने पर घर लौटा हूँ, फिर मैं माखन कब खाता?”

  2. कान्हा की दूसरी दलील (शारीरिक तर्क):
    “मैया, ज़रा सोचो! मैं तो अभी छोटा सा बालक हूँ, मेरे हाथ इतने छोटे-छोटे हैं। इतनी ऊंचाई पर टंगे छींके तक मेरा हाथ कैसे पहुंच सकता है?”

  3. कान्हा की तीसरी दलील (ग्वालों पर आरोप):
    “ये सारे ग्वाल-बाल मुझसे जलते हैं और मेरे बैरी बन गए हैं। इन्होंने ही जबरदस्ती पकड़कर मेरे मुख पर माखन लपेट दिया है ताकि तुम मुझे डांटो।”

  4. कान्हा का रूठना (अंतिम अस्त्र):
    कान्हा आगे कहते हैं— “मैया, तू दिल की बहुत भोली है, इसलिए इन सबकी झूठी बातों पर भरोसा कर लेती है। मुझे लगता है कि तेरे मन में मेरे प्रति कोई भेद आ गया है, तू मुझे पराया समझने लगी है। ले! संभाल अपनी लाठी और कंबल, आज के बाद मैं तेरी गायें चराने नहीं जाऊंगा, तूने मुझे बहुत नचा लिया!”

  5. यशोदा मैया का वात्सल्य:
    सूरदास जी कहते हैं कि अपने नन्हे लाल की ऐसी चतुर और भोली बातें सुनकर माता यशोदा का सारा क्रोध पलभर में गायब हो गया। वे मंद-मंद मुस्कुराने लगीं और प्रेम में भरकर उन्होंने कान्हा को उठाकर अपने गले और छाती से लगा लिया।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न १: ‘मैया मैं नहि माखन खायो’ पद के रचयिता कौन हैं और यह किस भाषा में है?
उत्तर: इस अमर पद के रचयिता भक्तिकाल के महाकवि सूरदास जी हैं और यह पद विशुद्ध एवं मधुर ब्रजभाषा में लिखा गया है।

प्रश्न २: इस पद में कौन सा मुख्य रस है?
उत्तर: इस पद में मुख्य रूप से वात्सल्य रस है, जिसमें माता यशोदा और बाल कृष्ण के बीच का अलौकिक वात्सल्य और ममता प्रकट होती है।

प्रश्न ३: कान्हा ने छींके तक न पहुंचने का क्या कारण बताया?
उत्तर: कान्हा ने कहा कि “मैं बालक बहियन को छोटो”, यानी मैं तो छोटा सा बालक हूँ और मेरे हाथ बहुत छोटे हैं, इसलिए मैं ऊंचाई पर लटके छींके तक नहीं पहुंच सकता।

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