श्यामा आन बसो वृन्दावन में | Shyama Aan Baso Vrindavan Mein Lyrics

Shyama Aan Baso Vrindavan Mein Lyrics

Shyama Aan Baso Vrindavan Mein Lyrics in Hindi And English

ब्रजभूमि और वृंदावन धाम की महिमा का बखान करता यह कालातीत और अत्यंत लोकप्रिय कृष्ण भजन “श्यामा आन बसो वृन्दावन में, मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में” हर भक्त के हृदय में गोपी भाव और अनन्य प्रेम भर देता है। पूज्य विनोद जी अग्रवाल और पूज्य चित्र विचित्र जी महाराज द्वारा गाए जाने के बाद यह भजन हर कीर्तन और संकीर्तन का प्राण बन चुका है।

इस भजन में एक विरहिणी गोपी अपने प्रियतम श्यामसुंदर को गोकुल से वृंदावन पधारने और अपने जीवन को धन्य करने की प्रेमभरी मनुहार करती है।

नीचे इस सुप्रसिद्ध भजन के संपूर्ण बोल (Lyrics) शुद्ध हिंदी और इंग्लिश (Hinglish) में दिए गए हैं:


भजन का संक्षिप्त परिचय (Bhajan Overview):

विवरणजानकारी
भजन का नाम:श्यामा आन बसो वृन्दावन में
समर्पित:भगवान श्री कृष्ण (बाँके बिहारी) एवं श्री राधा रानी
भाव:गोपी भाव, मधुर रस और विरह-मिलन
प्रसिद्ध गायक:पूज्य विनोद अग्रवाल जी / पूज्य चित्र विचित्र जी महाराज
भाषा:ब्रज मिश्रित हिंदी (Hindi / Brajbhasha)

श्यामा आन बसो वृन्दावन में लिरिक्स (हिंदी में)

स्थायी:
श्यामा आन बसो वृन्दावन में,
मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में!
श्यामा आन बसो वृन्दावन में,
मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में! 🌸🪷

अंतरा १:
श्यामा रस्ते में बाग लगा जाना,
फूल बीनूँगी तेरी माला के लिए!
तेरी बाट निहारूँ कुंजन में,
मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में!
श्यामा आन बसो वृन्दावन में… 🌼💐

अंतरा २:
श्यामा रस्ते में कुआँ खुदवा जाना,
मैं तो नीर भरूँगी तेरे लिए!
मैं तुझे नहलाऊँगी मल-मल के,
मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में!
श्यामा आन बसो वृन्दावन में… 🍯💧

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अंतरा ३:
श्यामा मुरली मधुर सुना जाना,
मोहे आके दरश दिखा जाना!
तेरी सूरत बसी है अँखियन में,
मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में!
श्यामा आन बसो वृन्दावन में… 🪈✨

अंतरा ४:
श्यामा वृन्दावन में आ जाना,
आकर के रास रचा जाना!
सूनी गोकुल की गलियन में,
मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में!
श्यामा आन बसो वृन्दावन में… 💃🕺

अंतरा ५:
श्यामा माखन चुराने आ जाना,
आकर के दधि बिखरा जाना!
बस आप रहो मेरे मन में,
मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में!

श्यामा आन बसो वृन्दावन में,
मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में!
श्यामा आन बसो वृन्दावन में,
मेरी उम्र बीत गयी गोकुल में… 🙏❤️

Shyama Aan Baso Vrindavan Mein Lyrics in English (Hinglish)

Sthayi:
Shyama Aan Baso Vrindavan Mein,
Meri Umar Beet Gayi Gokul Mein!
Shyama Aan Baso Vrindavan Mein,
Meri Umar Beet Gayi Gokul Mein!

Antara 1:
Shyama Raste Mein Baag Laga Jaana,
Phool Beenoongi Teri Maala Ke Liye!
Teri Bat Niharoon Kunjan Mein,
Meri Umar Beet Gayi Gokul Mein!
Shyama Aan Baso Vrindavan Mein…

Antara 2:
Shyama Raste Mein Kuan Khudwa Jaana,
Main To Neer Bharoongi Tere Liye!
Main Tujhe Nahlaoongi Mal-Mal Ke,
Meri Umar Beet Gayi Gokul Mein!
Shyama Aan Baso Vrindavan Mein…

Antara 3:
Shyama Murli Madhur Suna Jaana,
Mohe Aake Darash Dikha Jaana!
Teri Soorat Basi Hai Ankhiyan Mein,
Meri Umar Beet Gayi Gokul Mein!
Shyama Aan Baso Vrindavan Mein…

Antara 4:
Shyama Vrindavan Mein Aa Jaana,
Aakar Ke Raas Racha Jaana!
Sooni Gokul Ki Galiyan Mein,
Meri Umar Beet Gayi Gokul Mein!
Shyama Aan Baso Vrindavan Mein…

Antara 5:
Shyama Makhan Churane Aa Jaana,
Aakar Ke Dadhi Bikhra Jaana!
Bas Aap Raho Mere Man Mein,
Meri Umar Beet Gayi Gokul Mein!

Shyama Aan Baso Vrindavan Mein,
Meri Umar Beet Gayi Gokul Mein!
Shyama Aan Baso Vrindavan Mein,
Meri Umar Beet Gayi Gokul Mein…

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भजन का दिव्य भावार्थ (Spiritual Meaning):

  • गोपी भाव की पराकाष्ठा: गोकुल से जब कान्हा मथुरा चले गए, तो ब्रज की गोपियाँ विरह में व्याकुल हो उठीं। वे कान्हा से प्रार्थना करती हैं कि अब वृंदावन की पावन कुंज गलियों में आकर बस जाओ।

  • सेवा की अभिलाषा: भक्त प्रभु के लिए पुष्प चुनकर माला बनाना चाहता है, मीठा जल भरकर अपने हाथों से प्रभु को स्नान कराना चाहता है और कान्हा की मधुर मुरली सुनकर जीवन सफल करना चाहता है।

  • मन मंदिर में निवास: अंत में भक्त कहता है कि हे श्यामा, चाहे तुम माखन चुराने के बहाने आओ या रास रचाने के बहाने, बस सदैव मेरे हृदय में वास करो।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs):

प्रश्न १: “श्यामा आन बसो वृन्दावन में” भजन किस अवसर पर सबसे ज्यादा गाया जाता है?
उत्तर: यह भजन हर प्रकार के कृष्ण संकीर्तन, वृंदावन परिक्रमा, शरद पूर्णिमा रासोत्सव और जन्माष्टमी के पावन पर्व पर अत्यंत उल्लास और भक्ति के साथ गाया जाता है।

प्रश्न २: इस भजन के सबसे लोकप्रिय गायक कौन हैं?
उत्तर: इस भजन को पूज्य रसिक संत श्री विनोद जी अग्रवाल और श्री चित्र-विचित्र जी महाराज ने अपने अलौकिक भाव से गाकर पूरे विश्व में विख्यात किया है।

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