राधा पूछ रही तुलसी से लिरिक्स | Radha Pooch Rahi Tulsi Se Lyrics

Radha Pooch Rahi Tulsi Se Lyrics

राधा पूछ रही तुलसी से लिरिक्स | Radha Pooch Rahi Tulsi Se Lyrics in Hindi & English (तुलसी माता भजन)

हिन्दू धर्म में कार्तिक मास, देवउठनी एकादशी और तुलसी विवाह के पावन दिनों में तुलसी महारानी के पूजन का विशेष महत्व है। भगवान श्रीकृष्ण की दो सबसे प्रिय शक्तियों— श्री राधा रानी और माता तुलसी (वृंदा देवी) के बीच के मधुर संवाद को दर्शाता यह भजन अत्यंत लोकप्रिय है।

जब राधा जी कौतूहलवश तुलसी जी से उनके ससुराल और उनके पति के विषय में पूछती हैं, तो तुलसी माता कितने सुंदर और प्रेमपूर्ण शब्दों में भगवान श्रीकृष्ण और गोकुल परिवार का परिचय देती हैं, इसका अत्यंत मनोहारी चित्रण “राधा पूछ रही तुलसी से, तुलसी कहाँ तेरी ससुराल” भजन में किया गया है।

🪔 राधा पूछ रही तुलसी से लिरिक्स (हिन्दी में)

राधा पूछ रही तुलसी से,
तुलसी कहाँ तेरी ससुराल ।

कहाँ तेरी ससुराल तुलसी,
कौन तेरे भरतार ?
राधा पूछ रही तुलसी से,
तुलसी कहाँ तेरी ससुराल ॥

नीलगगन हैं पिता हमारे,
भागीरथी हैं मात ।
वृंदावन ससुराल हमारी,
सांवरिया भरतार ॥
॥ राधा पूछ रही तुलसी से…॥

बलदाऊ हैं जेठ हमारे,
मात यशोदा सास ।
नंद बाबा हैं ससुर हमारे,
ननद सुभद्रा हमार ॥
॥ राधा पूछ रही तुलसी से…॥

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तुम तो राधा बगल बिराजो,
मोर मुकुट जिनके शीश ।
बिन मेरे हरि भोग न भावै,
करें न वो स्वीकार ॥
॥ राधा पूछ रही तुलसी से…॥

होती मैं तुलसी से कहाऊँ,
हरि मेरे भाग्य ।
यही परिचय हैं बहना मेरा,
हरि हैं तेरे सुहाग ॥
राधा पूछ रही तुलसी से,
तुलसी कहाँ तेरी ससुराल ।
कहाँ तेरी ससुराल तुलसी,
कौन तेरे भरतार ॥

📿 Radha Pooch Rahi Tulsi Se Lyrics in English

Radha Pooch Rahi Tulsi Se,
Tulsi Kahaan Teri Sasuraal.
Kahaan Teri Sasuraal Tulsi,
Kaun Tere Bhartaar?
Radha Pooch Rahi Tulsi Se,
Tulsi Kahaan Teri Sasuraal.

Neelgagan Hain Pita Humare,
Bhaagirathi Hain Maat.
Vrindavan Sasuraal Humari,
Saanwariya Bhartaar.
|| Radha Pooch Rahi Tulsi Se… ||

Baldaau Hain Jeth Humare,
Maat Yashoda Saas.
Nand Baba Hain Sasur Humare,
Nanad Subhadra Hamaar.
|| Radha Pooch Rahi Tulsi Se… ||

Tum To Radha Bagal Biraajo,
Mor Mukut Jinke Sheesh.
Bin Mere Hari Bhog Na Bhaave,
Karein Na Vo Sweekaar.
|| Radha Pooch Rahi Tulsi Se… ||

Hoti Main Tulsi Se Kahaaoon,
Hari Mere Bhaagya.
Yahi Parichay Hain Behna Mera,
Hari Hain Tere Suhaag.
Radha Pooch Rahi Tulsi Se,
Tulsi Kahaan Teri Sasuraal.
Kahaan Teri Sasuraal Tulsi,
Kaun Tere Bhartaar.

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🌸 भजन का आध्यात्मिक भावार्थ एवं रहस्य

अलौकिक संबंध और परिचय:
तुलसी माता अपने जन्म का रहस्य बताते हुए कहती हैं कि विशाल नीला आकाश उनके पिता हैं और पतित पावनी गंगा जी उनकी माता हैं। उनका ससुराल पावन धाम वृन्दावन है और सांवरे कन्हैया ही उनके पति (भरतार) हैं।

गोकुल परिवार से नाता:
तुलसी जी बड़े गर्व और आनंद से बताती हैं कि माता यशोदा उनकी सास हैं, नंद बाबा ससुर हैं, बलदाऊ जी जेठ हैं और सुभद्रा उनकी ननद हैं। इस प्रकार वे स्वयं को ब्रज परिवार का अभिन्न अंग बताती हैं।

‘बिन मेरे हरि भोग न भावै’:
तुलसी माता राधा जी से कहती हैं कि हे राधा रानी! आप तो प्रभु के हृदय में और उनके वाम अंग में सदा विराजमान रहती हैं, “परंतु मेरी महिमा यह है कि मेरे बिना प्रभु छप्पन प्रकार के भोग को भी स्वीकार नहीं करते। जब तक मुझ तुलसी दल का समर्पण न हो, भगवान का भोग अधूरा रहता है।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न १: तुलसी माता के इस भजन का मुख्य भाव क्या है?
उत्तर: इस भजन का मुख्य भाव श्री राधा और तुलसी माता के बीच का निश्छल प्रेम और भगवान श्रीकृष्ण के प्रति दोनों का अनन्य समर्पण है।

प्रश्न २: भगवान श्रीकृष्ण के भोग में तुलसी पत्र का क्या महत्व है?
उत्तर: शास्त्रों के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण या भगवान विष्णु तुलसी पत्र के बिना कोई भी नैवेद्य या भोग स्वीकार नहीं करते। तुलसी दल से ही भोग पावन और तृप्तिकारक बनता है।

प्रश्न ३: यह भजन किस अवसर पर सबसे ज्यादा गाया जाता है?
उत्तर: यह भजन कार्तिक मास के स्नान-पूजन के समय, तुलसी विवाह (देवउठनी एकादशी), और शुक्रवार के दिन महिला सत्संग मंडलों में विशेष रूप से गाया जाता है।

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