अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो Are Dwarpalon Kanhaiya Se Keh Do Lyrics

Are Dwarpalon Kanhaiya Se Keh Do Lyrics in Hindi

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो लिरिक्स | Are Dwarpalon Kanhaiya Se Keh Do Lyrics in Hindi & English

संसार में मित्रता की जब भी मिसाल दी जाती है, तो भगवान श्री कृष्ण और भक्त सुदामा का नाम स्वर्ण अक्षरों में लिया जाता है। एक तरफ तीनों लोकों के स्वामी द्वारकाधीश श्री कृष्ण और दूसरी तरफ फटे वस्त्रों में दरिद्रता झेलते बालसखा सुदामा।

“अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो, दर पे सुदामा गरीब आ गया है” भजन उस क्षण की पराकाष्ठा है जब सुदामा द्वारका के स्वर्ण महल के द्वार पर खड़े होकर केवल अपने मित्र से एक बार मिलने की याचना करते हैं। यह प्रसंग सुनकर आँखों से आँसू छलक पड़ते हैं।

🪔 अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो लिरिक्स (हिन्दी में)

प्रस्तावना (दोहा):
देखो देखो यह गरीबी, यह गरीबी का हाल,
कृष्ण के दर पे यह विश्वास ले के आया हूँ ।
मेरे बचपन का दोस्त है मेरा श्याम,
यही सोच कर मैं आस ले कर के आया हूँ ॥

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो,
दर पे सुदामा गरीब आ गया है ।
भटकते भटकते ना जाने कहाँ से,
तुम्हारे महल के करीब आ गया है ॥

ना सर पे है पगड़ी, ना तन पे है जामा,
बता दो कन्हैया को नाम है सुदामा ।
इक बार मोहन से जा करके कह दो,
मिलने सखा बदनसीब आ गया है ॥
॥ अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो…॥

सुनते ही दौड़े चले आये मोहन,
लगाया गले से सुदामा को मोहन ।
हुआ रुकमणी को बहुत ही अचम्भा,
यह मेहमान कैसा अजीब आ गया है ॥
॥ अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो…॥

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और बराबर पे अपने सुदामा बिठाये,
चरण आंसुओं से श्याम ने धुलाये ।
ना घबराओ प्यारे जरा तुम सुदामा,
ख़ुशी का समां तेरे करीब आ गया है ॥

अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो,
दर पे सुदामा गरीब आ गया है ।
भटकते भटकते ना जाने कहाँ से,
तुम्हारे महल के करीब आ गया है ॥

📿 Are Dwarpalon Kanhaiya Se Keh Do Lyrics in English (Roman Script)

Doha:
Dekho Dekho Yeh Garibi, Yeh Garibi Ka Haal,
Krishna Ke Dar Pe Yeh Vishwas Le Ke Aaya Hoon.
Mere Bachpan Ka Dost Hai Mera Shyam,
Yahi Soch Kar Main Aas Le Kar Ke Aaya Hoon.

Are Dwaarpaalon Kanhaiya Se Keh Do,
Dar Pe Sudama Garib Aa Gaya Hai.
Bhatakte Bhatakte Na Jaane Kahaan Se,
Tumhare Mahal Ke Karib Aa Gaya Hai.

Na Sar Pe Hai Pagdi, Na Tan Pe Hai Jaama,
Bata Do Kanhaiya Ko Naam Hai Sudama.
Ik Baar Mohan Se Jaa Karke Keh Do,
Milne Sakha Badnaseeb Aa Gaya Hai.
|| Are Dwaarpaalon Kanhaiya Se Keh Do… ||

Sunte Hi Daude Chale Aaye Mohan,
Lagaaya Gale Se Sudama Ko Mohan.
Hua Rukmani Ko Bahut Hi Achambha,
Yeh Mehmaan Kaisa Ajeeb Aa Gaya Hai.
|| Are Dwaarpaalon Kanhaiya Se Keh Do… ||

Aur Baraabar Pe Apne Sudama Bithaaye,
Charan Aansuon Se Shyam Ne Dhulaaye.
Na Ghabraao Pyaare Zara Tum Sudama,
Khushi Ka Samaan Tere Karib Aa Gaya Hai.

Are Dwaarpaalon Kanhaiya Se Keh Do,
Dar Pe Sudama Garib Aa Gaya Hai.
Bhatakte Bhatakte Na Jaane Kahaan Se,
Tumhare Mahal Ke Karib Aa Gaya Hai.


Shree Krsihna Ke Naya Bhajan Lyrics

🌸 इस प्रसंग का भावार्थ एवं आध्यात्मिक संदेश
  1. सच्ची मित्रता में कोई छोटा-बड़ा नहीं होता:
    जब द्वारपालों ने जाकर केवल ‘सुदामा’ नाम लिया, तो प्रभु कृष्ण ने अपने राजसी वैभव, मुकुट और पीताम्बर की भी परवाह नहीं की और नंगे पाँव दौड़ते हुए द्वार तक पहुँच गए। भगवान के लिए धन, प्रतिष्ठा या गरीबी कोई मायने नहीं रखती, वे केवल प्रेम और भाव के भूखे हैं।

  2. ‘चरण आंसुओं से श्याम ने धुलाये’:
    महल में लाकर भगवान कृष्ण ने सुदामा को अपने सिंहासन पर बैठाया। सुदामा जी के कांटों भरे और फटे हुए चरणों को देखकर प्रभु इतने द्रवित हुए कि परात के जल को छूने की आवश्यकता ही नहीं पड़ी, उनके नयनों से बहते प्रेमाश्रुओं से ही सखा के चरण धुल गए।

  3. अयाचक सुदामा पर कृपा:
    सुदामा ने संकोचवश कुछ नहीं मांगा, केवल तंदुल (चावल की पोटली) भेंट की। लेकिन अंतर्यामी प्रभु ने बिन मांगे ही सुदामा को दोनों लोकों की संपत्ति और स्वर्ण महल प्रदान कर दिया।


❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न १: ‘अरे द्वारपालों कन्हैया से कह दो’ भजन के प्रसिद्ध गायक कौन हैं?
उत्तर: इस भजन को लखबीर सिंह लक्खा, रामकुमार लक्खा और विभिन्न प्रसिद्ध कलाकारों ने अपनी आवाज दी है, जिसके बाद यह पूरे भारत में लोकप्रिय हो गया।

प्रश्न २: सुदामा जी द्वारका में भगवान कृष्ण के लिए क्या भेंट लेकर गए थे?
उत्तर: सुदामा जी की पत्नी सुशीला ने पड़ोस से मांगकर चार मुट्ठी पोहा (चावल/तंदुल) एक फटे कपड़े में बांधकर प्रभु को भेंट करने के लिए दिए थे।

प्रश्न ३: भगवान कृष्ण ने सुदामा के चरण किस प्रकार धोए?
उत्तर: नरोत्तमदास जी के प्रसिद्ध दोहे के अनुसार— “पानी परात को हाथ छुयो नहिं, नैनन के जल सों पग धोये।” प्रभु ने अपने आंसुओं से ही सुदामा जी के चरण पखार दिए थे।

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